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बच्चों में कब्ज़: डायट और एक्सरसाइज से आसान समाधान

क्या कब्ज़ क्या होता है?

  • कब्ज़ तब होता है जब बच्चे के पखाने कम बार हों या पखाना सख्त और दर्दनाक हो।
  • यह बच्चे के पेट में भारीपन, पेट फूलना और कभी-कभी पेट दर्द का कारण बन सकता है।
  • कब्ज़ बच्चे की रोज़मर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है और असहजता पैदा करता है।

कब्ज़ के कारण क्या हैं?

  • फाइबर की कमी वाले खाने, जैसे कम फल-सब्ज़ियाँ या ज्यादा जंक फूड।
  • पानी या तरल पदार्थ कम पीना जिससे पेट सूख जाता है।
  • शारीरिक गतिविधि की कमी, बच्चे का कम खेलना-फिरना।
  • तनाव, स्कूल या घर में बदलाव, या बच्चों का पब्लिक टॉयलेट का डर।
  • कुछ दवाइयाँ या स्वास्थ्य समस्याएं भी कब्ज़ का कारण बन सकती हैं।

कब्ज़ के सामान्य लक्षण क्या हैं?

  • कम पखाना या 3-4 दिन तक पखाना न होना।
  • पखाना सख्त और दर्दनाक होना।
  • पेट फूलना या गैस होना।
  • बच्चा बार-बार पेट पकड़कर बैठना या रोना।

कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

  • कब्ज़ लंबे समय तक लगातार बना रहे।
  • पखाने में खून दिखाई दे।
  • बच्चा पेट दर्द या उल्टी के साथ परेशान हो।
  • वजन कम होना या भूख कम लगना।
  • बच्चा बहुत थका हुआ और सुस्त लगे।

कब्ज़ से कैसे बचा जा सकता है?

  • बच्चे को रोज़ पर्याप्त फल और सब्ज़ियाँ दें।
  • अनाज और दालें खाने में शामिल करें।
  • जंक फूड और तली-भुनी चीज़ें कम दें।
  • पर्याप्त पानी और दूध पिलाएं।
  • बच्चे को रोज़ हल्की एक्सरसाइज और खेल‑कूद कराएं।

क्या फाइबर मदद करता है?

  • हरी सब्ज़ियाँ, फल, दलिया, ब्राउन ब्रेड, बीन्स आदि फाइबर के अच्छे स्रोत हैं।
  • फाइबर पखाने को नरम बनाता है और नियमित पाचन में मदद करता है।
  • बच्चों को फाइबर खाने में मज़ेदार तरीके से शामिल करना चाहिए, जैसे कटे हुए फल या स्मूदी।

पानी क्यों जरूरी है?

  • पानी शरीर में नमी बनाए रखता है और पखाना नरम रखता है।
  • बच्चे को दिनभर में छोटे-छोटे गिलास में पानी पिलाएं।
  • जूस या सॉफ्ट ड्रिंक कम पिलाएं क्योंकि इनमें चीनी ज्यादा होती है।

क्या एक्सरसाइज मदद करती है?

  • हल्की एक्सरसाइज और खेल-कूद पेट की मांसपेशियों को मजबूत करती है।
  • यह पाचन तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करती है।
  • बच्चों को दिन में 30 मिनट खेलने या दौड़ने के लिए प्रोत्साहित करें।

क्या तनाव कब्ज़ बढ़ाता है?

  • हां, स्कूल, परीक्षा या घर का तनाव पाचन पर असर डाल सकता है।
  • बच्चे को आराम और समय पर टॉयलेट जाने की आदत डालना जरूरी है।
  • उन्हें समझाएं कि पखाना रोकना या डरना सही नहीं है।

क्या दवा से इलाज किया जा सकता है?

  • कभी-कभी डॉक्टर पखाने को नरम करने या नियमित करने वाली दवा देते हैं।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न दें।
  • दवा के साथ ही सही डायट और एक्सरसाइज जरूरी हैं।

कब यह गंभीर हो सकता है?

  • लगातार कब्ज़, पखाने में खून, उल्टी या वजन कम होना।
  • बच्चा बहुत परेशान, सुस्त या कमजोरी महसूस करे।
  • ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

क्या बच्चों में कब्ज़ आम है?

  • हां, 2-12 साल के बच्चों में कब्ज़ आमतौर पर होता है।
  • यह बच्चों के खाने-पीने और आदतों पर निर्भर करता है।
  • सही डायट और जीवनशैली से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

क्या जंक फूड कब्ज़ बढ़ाता है?

  • हां, ज्यादा तली-भुनी और जंक फूड पेट को सुस्त कर देती है।
  • इनसे फाइबर कम मिलता है और पाचन धीमा होता है।
  • बच्चों को हेल्दी स्नैक्स और फल देना बेहतर होता है।

कब घरेलू उपाय मदद कर सकते हैं?

  • पानी, फाइबर और हल्की एक्सरसाइज अक्सर कब्ज़ में राहत देते हैं।
  • बच्चों को गर्म पानी या हल्की चाय नहीं देने की जरूरत होती, बल्कि प्राकृतिक तरल पदार्थ सही हैं।
  • घर पर फलों और सब्ज़ियों के स्मूदी, दलिया या सलाद देना सहायक होता है।

क्या बच्चे को टॉयलेट जाने की आदत डालनी चाहिए?

  • हां, बच्चे को रोज़ समय पर टॉयलेट जाने की आदत डालें।
  • इसे खेल या मजेदार तरीके से कराएं ताकि बच्चा डर या हिचकिचाहट न महसूस करे।
  • नियमित आदत कब्ज़ को रोकने में सबसे ज्यादा असर करती है।

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